कॉलेज की यादें
कॉलेज के पहले दिन की याद आज भी ताजी है। नया शहर, नया कॉलेज, नए लोग। सब कुछ अजनबी और रोमांचक लग रहा था।
रोहन ने जब पहली बार प्रिया को देखा, तो वो लाइब्रेरी में किताबों के बीच बैठी थी। उसके बाल खुले थे और वो बड़े ध्यान से पढ़ रही थी।
"यह सीट खाली है?" रोहन ने पूछा।
प्रिया ने सिर उठाकर देखा। उसकी आँखें बड़ी और गहरी थीं। "हाँ, बैठ जाओ।"
बस, वो पहली मुलाकात एक नई कहानी की शुरुआत थी। रोहन और प्रिया की दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गई।
कैंटीन में चाय की चुस्कियाँ, क्लास बंक करके पार्क में बैठना, रात को फोन पर घंटों बातें — ये सब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गए।
तीसरे साल में जब एग्जाम का प्रेशर था, रोहन ने महसूस किया कि प्रिया के बिना वो अधूरा था। वो सिर्फ एक दोस्त नहीं, बहुत कुछ थी।
एक शाम, कॉलेज की छत पर सूरज डूबते देखते हुए रोहन ने कह दिया जो वो बहुत दिनों से मन में रख रहा था।
"प्रिया, मुझे लगता है मैं तुमसे प्यार करता हूँ।"
कुछ पल की चुप्पी के बाद प्रिया मुस्कुराई। "मुझे लगता था तुम कभी बोलोगे नहीं।"
वो शाम, वो छत, वो सूरज का ढलना — सब कुछ जादुई था। कॉलेज की वो यादें आज भी उनके दिलों में जिंदा हैं।